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वाघा बॉर्डर पर सूर्यास्त से पहले होती है रिट्रीट सेरेमनी - निखिलेश मिश्रा

Sunday, January 24, 2021

/ by Dr Pradeep Dwivedi
निखिलेश मिश्रा
लखनऊ


वाघा भारत के अमृतसर तथा पाकिस्तान के लाहौर के बीच ग्रैंड ट्रंक रोड पर स्थित गाँव है, जहाँ से दोनों देशों की सीमा गुजरती है। भारत और पाकिस्तान के बीच थल-मार्ग से सीमा पार करने का यही एकमात्र निर्धारित स्थान है। यह स्थान अमृतसर से ३२ किमी तथा लाहौर से २२ किमी दूरी पर स्थित है। वाघा बॉर्डर पाकिस्तान की ओर के क्षेत्र को कहते है तथा भारत की ओर के क्षेत्र का नाम अटारी बार्डर है। जिसे सरदार श्याम सिंह अटारी के नाम पर रखा गया है वे महाराजा रणजीत सिंह के सेना प्रमुख थे।

पंजाब का वाघा बॉर्डर जो भारत और पाकिस्तान को अलग करता है। रोजाना सूर्यास्त से पहले वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी होती है। इस सेरेमनी में भारत और पाकिस्तान के जवान शामिल होते हैं। इसको देखने के लिए दोनों के तरफ काफी संख्या में पर्यटक आते हैं।

वाघा बॉर्डर जाने के लिए आपको पहले अमृतसर पहुंचना पड़ेगा। अमृतसर जाने के लिए आपके पास बस, ट्रेन और फ्लाइट तीनों ही विकल्प हैं। श्री गुरु राम दास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट अमृतसर का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है। यहां से शहर तक जाने के लिए टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा आप ट्रेन और बस से भी अमृतसर जा सकते हैं।

आप वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी सही समय पर देखना चाहते हैं तो आपको ३ बजे से पहले पहुंचना होगा। ऐसा इसलिए है कि यहां पर पहुंचने के बाद सुरक्षा जांच, बैग या सामान जमा करना और सीट तक पहुंचने में समय लगता है। गर्मियों में रिट्रीट सेरेमनी का समय ५ बजकर १५ मिनट और सर्दियों में ४ बजकर १५ मिनट है। यहां होने वाली रिट्रीट सेरेमनी ४५ मिनट तक चलती है। वाघा बार्डर सुबह १० बजे से शाम ४ बजे तक खुला रहता है।

अगर पर्यटक गोल्डन टेंपल से बाघा बॉर्डर जाना चाहता है तो वह ३५ किलोमीटर की यात्रा के लिए टैक्सी कर सकता है। यहां आसानी से टैक्सी मिल जाती है और इसमें एक व्यक्ति का १०० से १२० किराया लगता है। इस यात्रा में एक घंटे का समय लगता है। आप चाहें तो यहां सिंगल या शेयरिंग कैब कर सकते हैं।

आधिकारिक तौर पर इस समारोह का उद्देश्य औपचारिक रूप से रात के लिए सीमा को बंद करना और राष्ट्रीय ध्वज को नीचे उतारना (flag lowering ceremony) है। झंडा उतारने का काम सूर्यास्त से २ घंटे पहले किया जाता है। हालांकि, यह एक मनोरंजन समारोह है लेकिन इसको देशभक्ति प्रदर्शन की तरह हर दिन प्रदर्शित किया जाता है।

इस सेरेमनी में राष्ट्रीय गान को बजाया जाता है, देशभक्ति के नारे लगाये जाते हैं और बॉलीवुड के गानों पर डांस भी किया जाता है। इसके अलावा कभी-कभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। 

इस सेरेमनी के समय यह बॉर्डर एक युद्ध के मैदान की तरह दिखता है, क्योंकि जुलूस जोर से चिल्लाने और सैनिकों द्वारा भारी पैर के साथ कदमताल करके आयोजित किया जाता है। मार्चिंग के दौरान भारत और पाकिस्तान के सैनिक अपने पैरों को एक दूसरे के सिर से ऊपर तक उठाते हैं। इसे “Goose Marching” कहा जाता है। इसमें दोनों और के सैनिक एक दूसरे को हराने का प्रयास भी करते हैं। यह पूरा आयोजन लगभग ४५ मिनट तक चलता है।

ध्वज समारोह, पाकिस्तान रेंजर्स और भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा आयोजित किया जाता है। इस सेरेमनी का आयोजन सन १९५९ से हर दिन किया जा रहा है लेकिन जब भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद ज्यादा बढ़ जाता है तो इस समारोह को कुछ दिन के लिए बंद भी कर दिया जाता है।

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