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तेरा साथ मेरा नसीब है - निभा चौधरी

Sunday, January 24, 2021

/ by Dr Pradeep Dwivedi
  निभा चौधरी
आगरा


तेरी ज़ुस्तजू से महक रहा मेरी चाहतों का मकान है,

तेरा साथ मेरा नसीब है तेरा प्यार मेरा जहान है....


तेरे आने की जो ख़बर उड़ी, मेरे दिल की बगिया भी खिल गई

किसी बुझते दीप को ज्यूँ नई कोई बाती तेल की मिल गई।।

कि चकोर को किसी चाँद का, मिला साथ है नौ बहार में।

किसी राग सी ही बजे है तू, मेरी सांस सांस के तार में।।

मेरे दिल के फूल के वास्ते, तू भ्रमर का प्रेम रुझान है.....

तेरा साथ मेरा नसीब है तेरा प्यार मेरा जहान है.....


खिले चाँद सा मेरा रूप है, दो अधर हैं फूल गुलाब के।

घनी ज़ुल्फ छांव है शाम की, दो नयन पियाले शराब के।।

मेरी चूड़ियों की खनक में है, मधु तान जैसे सितार की।

किसी दास्तां में छुपी हुई, मैं कोई कली हूँ अनार की।।

चढा तीर जिस पे विलास का, मेरी भौंह ऐसी कमान है..

तेरा साथ मेरा नसीब....


तेरा इस्म पढ़ के ही दम किया, हसीं इश्क़ का है ये आशियाँ।

वहीं दिल बिछा दूँ क़दम पड़ें, मेरी जान तेरे जहाँ जहाँ।

मैं ही दिल जिगर की हूँ मल्लिका ,मैं ही राजरानी दयार की।

मैं ही एक चाह रही सदा तेरी ख़्वाहिशों के हिसार की।।

जो शिखर पे ला के खड़ा करे, तू वो मस्तियों की ढलान है...

तेरा साथ मेरा नसीब है तेरा प्यार मेरा जहान है..

               

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