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प्यार आसमा से ऊंचा - वंदना गुप्ता

Wednesday, January 6, 2021

/ by Dr Pradeep Dwivedi
वंदना गुप्ता
लखनऊ


प्यार  ना कम होता है

ना जादा होता है,

प्यार जब भी होता है बस बेतहाशा होता है।

प्यार की ना जात होती है

ना रंग होता है,

प्यार बस मनोभावों का द्वंद होता है।

देश प्रेम मातृ प्रेम ईश्वर के प्रति प्रेम सब प्यार के रूप है,

परिभाषाऐं अनेक पर भावनाए नेक हैं।

प्यार आसमा से ऊंचा

और समुंदर जैसा है,

जिसकी जैसी सोच प्यार वैसा है।

प्यार किर्तन भजन दोहा और गीत है,

प्यार मा की वंदना और जग की सबसे पावन प्रीति है।

प्यार बहुत ही सरल सरस और इत्र होता है,

मेरी नज़र से देखो तो प्यार गंगाजल की तरह पवित्र होता है।

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