Responsive Ad Slot

देश

national

तमन्नाओं के शहर में - मोना शर्मा पाठक

Wednesday, January 20, 2021

/ by Dr Pradeep Dwivedi
मोना शर्मा पाठक
ग्वालियर


तमन्नाओं के शहर में

कहीं मेरा भी बसेरा हो 

गुनगुनी सी धूप में 

चिड़ियों के शोर से सवेरा हो 

कहीं मेरा भी बसेरा हो ।


पंख फैला के उड़ने को 

दूर तलक ये आसमाँ सुनहरा हो 

कहीं मेरा भी बसेरा हो ।


बन के नदी सी मिल जाऊं समुंदर में

ऐसा कोई रास्ता मेरे लिए भी ठहरा हो 

कहीं मेरा भी बसेरा हो ।


खोलूँ जो आंखों को तो

कहीं अंधकार ना गहरा हो 

कहीं मेरा भी बसेरा हो ।


देखूं हर सूं अब खुद को

दुनिया में ऐसा एक मुकाम मेरा हो

कहीं मेरा भी बसेरा हो ।


सपनो को दे के रंग सारे 

रंगों से भरा उजेला हो 

कहीं मेरा भी बसेरा हो ।

No comments

Post a Comment

Don't Miss
© all rights reserved
Managed By-Indevin Infotech-Leading IT Company