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इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश,बिना वजह की गिरफ्तारी तो पुलिस पर होगी कार्रवाई

Saturday, January 30, 2021

/ by Editor

प्रयागराज


इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस को सात साल से कम सजा वाले अपराधों के आरोपितों की रूटीन गिरफ्तारी न करने के कानून का पालन करने का निर्देश दिया है। साथ ही मजिस्ट्रेट को भी निर्देश दिया है कि गिरफ्तारी पर पुलिस रिपोर्ट से संतुष्ट होने पर ही आरोपित को पुलिस रिमांड में दिया जाए।

'आदेश की अवहेलना पर होगी कार्रवाई'
कोर्ट ने पुलिस को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41(1) बी व 41-ए की शर्तों का पालन करते हुए, जरूरी होने पर ही आरोपित को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि अनावश्यक गिरफ्तारी की गई तो गलती करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने की कार्रवाई की जाएगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ केजे ठाकर व न्यायमूर्ति गौतम चौधरी की खंडपीठ ने एटा विमल कुमार व 3 अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने याची को अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करने की छूट दी है।

सेशन जज को भेजी जाए रिपोर्ट
कोर्ट ने प्रदेश के डीजीपी, विधि सचिव व महानिबंधक को आदेश की प्रति व परिपत्र सभी थानों के अनुपालनार्थ भेजने का निर्देश दिया है। यह भी कहा है कि बिना ठोस कारण के पुलिस द्वारा अभियुक्त को गिरफ्तार करने की रिपोर्ट जिला एवं सत्र न्यायाधीश के मार्फत महानिबंधक को भेजी जाए, ताकि मनमानी करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

याची ने दाखिल की थी याचिका
गौरतलब है कि शादी तय होने के बाद लड़की वालों ने याची पर आरोप लगाया था कि उसे रिंग सेरेमनी में साढ़े छह लाख रुपये दिए गए। इसके बाद याची की ओर से क्रेटा कार मिलने पर ही शादी करने की शर्त रख दी गई। इस पर लड़की वालों ने कोतवाली नगर, एटा में 28 नवंबर 2020 को दहेज उत्पीड़न के आरोप में एफआईआर दर्ज करवा दी। याची का कहना है कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से पुलिस उसके घर पर गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। इस पर याची ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए गिरफ्तारी पर रोक की याचिका दाखिल की थी।

यह है व्यवस्था
सीआरपीसी धारा 41(1) बी की शर्तों व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के तहत बिना ठोस कारण के सात साल से कम सजा वाले अपराधों के आरोपितों की रूटीन गिरफ्तारी नहीं हो सकती है। ऐसे मामलों में पुलिस को पहले आरोपित को थाने में पेश होने के लिए दो हफ्ते का नोटिस देना होता है। आरोपित के पेश न होने, साक्ष्य और पर्याप्त वजह होने पर ही गिरफ्तारी की जा सकती है।

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