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वरासत अभियान में गरीब ,मजदूर व किसानों को छूट रहे पसीने

हरिकेश यादव- संवाददाता (इंडेविन टाइम्स)

अमेठी।  

०वरासत के लिए तहसील में कार्यरत प्राइवेट रिश्वत की करते हैं मांग

० तहसील अमेठी में अवैध रूप से कार्यरत हैं एक दर्जन कर्मचारी

० मानक के विपरीत काम कर रहे प्राइवेट कर्मचारी

उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फरमान अमेठी जिलें में किसानों के लिए फायदेमंद नजर नही आ रहा है।  लेखपाल व राजस्व निरीक्षक के मनमानी के चलते वरासत अभियान में आनलाइन आवेदन करने के बावजूद किसानों को पसीने छूट रहे है। बिना रिश्वत के नामांतर वही व कंप्यूटर पर नही  दर्ज होता है मृतक आश्रितों का नाम।सब कुछ जानते हुए अनजान बना प्रसाशन।दिसम्बर से चला यह अभियान अब तक जारी है लेकिन तहसील मंे तैनात राजस्व निरीक्षक, रजिस्ट्रार कानून गो के कार्यालय में कितने आनलाइन आवेदन प्राप्त हुए और कितने किसानों का वरासत किया गया इसका डाटा नही मिल रहा है। लेखपाल वरासत में आनलाइन आवेदन के बावजूद कुछ खसरा नम्बर में उत्तराधिकार का आदेश नही दर्ज कर रहे है और कितने वरासत अभियान में आनलाइन आवेदन के बावजूद  उनकी वरासत लेखपाल नही कर रहे है यही नही राजस्व निरीक्षक कार्यालय में यह सूचना न ही उपलब्ध है कि अब तक कितने मृतक किसान है जिनका वरासत किया जाना है। सरकार कुछ करे लेकिन अधिकारी कर्मचारी के आगे किसान बेबस है। इनकी सुनिवाई नही हो रही है भ्रष्टाचार में डूबे कर्मचारी कब सुधरेगे ।

भारतीय किसान यूनियन, रीता सिंह किसान कल्याण समिति, प्रगतिशील किसान, अग्रणीय किसान आदि ने प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यानाथ से वरासत अभियान की जांच कराने तथा लंबित आनलाइन आवेदनेां के निस्तारण की माग उठाई है। मांगें न सुनी गयी तो आंदोलन की चेतावनी किसानों ने दी है। 

प्रशासन का दावा है कि विवादित वरासत के निस्तारण के लिए प्रयास चल रहे है। जिन आनलाइन आवेदन का उत्तराधिकार परिवर्तन किन्ही कारणों से कर्मचारी न ही कर रहे है तो उनके खिलाफ दंडात्मक प्रशासनिक कार्यवाही की जायेगी।

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