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समीक्षा (फिर लौटेंगी स्त्रियाँ) - समीक्षाकार अतुल पाठक " धैर्य "

Monday, May 24, 2021

/ by Dr Pradeep Dwivedi

 इंडेविन न्यूज नेटवर्क

अतुल पाठक "धैर्य"
हाथरस, उत्तर प्रदेश

फिर लौटेंगी स्त्रियाँ डॉ वंदना गुप्ता जी की एकल काव्य संग्रह का नाम है जिसमें उन्होंने समस्त समाज की मनोदशा जो न जाने कितनी परिस्थतियों से जूझती हुई अपने जीवन को जीती है। एक स्त्री के जीवन का सम्पूर्ण व्यक्तित्व, उसके सुख-दुख , दर्द की कराहटें , प्रेम की ख़ातिर उसका समर्पण , कैसे पराई स्त्री को नींचता से घूरता है नोंचना चाहता है आज का कलयुगी मानव इन सब बातों का दर्पण है ये काव्य संग्रह। 

समाज में स्त्री का क्या ओहदा है? आज भी अगर एक स्त्री के साथ कुछ गलत होता है तो ये समाज स्त्री को ही गलत नज़रिए से देखता है कभी स्त्री को समर्थन नहीं देता। एक पुरानी कहावत है कि ये समाज सीता जैसी पतिव्रता और पवित्र नारी को नहीं समझा, सम्मान नहीं दिया तो ये आज क्या नारी को समझ पाएगा। 

फिर लौटेंगी स्त्रियाँ काव्य संग्रह का सार ये है कि स्त्रियों को अपनी सामर्थ्य   अपनी सीमाओं को खुद तय करना होगा;अपना खोया हुआ सम्मान हक़ से लेना होगा। आज की स्त्री पुरुष से किसी भी मापदंड से कमतर नहीं आंकी जा सकती। हर क्षेत्र में स्त्री अपना सम्पूर्ण योगदान दे रही है अपनी पहचान खुद बना रही है। फिर लौटेंगी स्त्रियाँ काव्य संग्रह में छुपी स्त्रियों के मन की मौन गूँज है जो अपने हक़ की लड़ाई खुद लड़ना चाहती है और आज लड़ भी रही है और तब तक लड़ती रहेगी जब तक ही उसे उसका छीना हुआ सम्मान वापस नहीं मिल जाता और अपनी सफलता के परचम हिमालय तक लहरा रही हैं स्त्रियाँ। हौंसलों की उड़ान भर रही हैं स्त्रियाँ।

समाज को आईना दिखाने के लिए वंदना गुप्ता जी ने इस काव्य सग्रह की रचना की है। स्त्रियों की शक्ति अपार होती है आज पुरुष और स्त्री दोनों बराबर हैं।

स्त्री के प्रति जो गलत धारणाएं थीं जो कुरीतियां थीं आज बदलते वक्त के साथ समाज को बदलना होगा और स्त्री को वो हर सम्मान देना होगा जिसकी वो हक़दार है। 

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