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इलाहाबाद हाई कोर्ट का नया आदेश कम से कम चार माह के भीतर हो जाए यूपी में वैक्सीनेशन

Sunday, May 9, 2021

/ by Dr Pradeep Dwivedi

संवादसूत्र

इंडेविन न्यूज नेटवर्क

प्रयागराज।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोराना संक्रमण पर जल्दी काबू पाने के लिए राज्य सरकार से कहा कि सरकार टेंडर की लंबी प्रक्रिया अपनाने की बजाय सीधे इसकी खरीद का प्रयास करे क्योंकि जिस प्रकार से संक्रमण फैल रहा है और तीसरी लहर आने की आशंका बनी है वायरस का म्यूटेशन इतना तेज होगा यह वैक्सीन के प्रभाव को निष्प्रभावी कर देगा।

ऐसे में अब तक किए गए सभी प्रयासों का वांछित परिणाम नहीं मिल सकेगा। कोर्ट ने सरकार को वैक्सीन शीघ्र हासिल करने का रास्ता खोजने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि प्रदेशभर में टीकाकरण का कार्य तीन-चार माह में पूरा कर लिया जाए तभी इसका लाभ मिलेगा। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि संक्रमण में भले ही कमी आ रही है लेकिन यह आराम से बैठने का समय नहीं है।

तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर स्वास्थ्य सुविधाओं का ढांचा और मजबूत करने की जरूरत है।

कोर्ट ने प्रदेश के सभी न्यायिक मजिस्ट्रेट को जमाखोरों से जब्त किए गए रेमडेसिवर इंजेक्शन व अन्य जीवनरक्षक दवाएं जल्द रिलीज करने के लिए सम्बंधित मामलों का तीन दिन में निस्तारण करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने डीजीपी से कहा कि सकुर्लर जारी कर सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दें कि जब्त की गई दवाएं रिलीज कराने के लिए 24 घंटे में संबंधित मजिस्ट्रेट से संपर्क करें।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा एवं न्यायमूर्ति अजीत कुमार की खंडपीठ ने मेरठ के ट्रामा सेंटर में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के मामले में वहां के डीएम मेरठ की रिपोर्ट पर असंतोष जताया है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में डीएम मेरठ ने कोर्ट को बताया कि मौतें किसी अन्य कारण से हुई हैं। हालांकि वह कोर्ट के इस सवाल का जवाब नहीं दे सके कि मौतें किस कारण से हुईं और उस दिन सेंटर में कितनी ऑक्सीजन उपलब्ध थी। कोर्ट ने कहा कि स्पष्ट है कि डीएम ने सही तरीके से जांच नहीं की जबकि मामले पर न्यायिक स्तर से संज्ञान लेने के बाद उन्हें ऐसा करना चाहिए था। कोर्ट ने डीएम मेरठ को प्रकरण की विस्तृत जांच कर अगली सुनवाई पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

लखनऊ के दो अस्पतालों में ऑक्सीजन होने के बावजूद मरीजों को लौटाने के मामले में डीएम लखनऊ ने हलफनामा पेश कर बताया कि सन हॉस्पिटल की जांच में आरोपों को सही पाया गया है। उन्होंने ऑक्सीजन होने के बावजूद मरीजों को लौटाया। इसके लिए अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। दूसरे अस्पताल हर्ष हास्पिटल ने कोविड अस्पताल न होने के बावजूद गलत तरीके से कोविड मरीजों को भर्ती किया है। कोर्ट ने अगली तारीख पर इन अस्पतालों पर की गई कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया है। डीएम ने बताया कि ऑक्सीजन की आपूर्ति पर नजर रखने के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की गई है।

केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में ऑक्सीजन का कोई संकट नहीं है। मांग और आपूर्ति की मामूली दिक्कत थी लेकिन इतनी नहीं कि इसकी कमी से किसी की जान चली जाए। प्रदेश में अब पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है। मई 2021 मेंं साढ़े आठ करोड़ वैक्सीन उपलब्ध हैं। केंद्र सरकार के पास वैक्सीन के मद में 35 हजार करोड़ रुपये का बजट है। कोवैक्सीन और कोविशील्ड के अलावा और वैक्सीन बाहर से खरीदने के लिए सरकार ने वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए नियमों में ढील दी है। वैक्सीन बाजार में उपलब्ध होगी और इसे कोई भी खरीद सकता है। इस पर कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल से राज्य सरकार का पक्ष पूछा तो उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पहले ही ग्लोबल टेंडर जारी कर चुकी है।

राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 28 जिलों की प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार 77 सरकारी कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी के कारण मौत की जानकारी प्राप्त हुई है। अन्य जिलों का डाटा अगली सुनवाई पर पेश किया जाएगा। आयोग की ओर से मतगणना की सीसीटीवी रिकार्डिंग भी पेश की गई। पूरी रिपोर्ट के लिए और समय मांगा गया। कोर्ट को बताया गया कि कोराना से मरने वाले कर्मचारियों को सरकार ने 30 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्णय लिया है।

अधिवक्ता अनुज सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। सरकार का ध्यान बड़े शहरों पर ही केंद्रित है। कोर्ट ने अगली तारीख पर सरकार को ग्रामीण इलाकों और कस्बों में संक्रमण की रोकथाम पर अपनी योजना प्रस्तुत करने के लिए कहा है। साथ ही दिव्यांग जनों के लिए टीकाकरण कार्यक्रम पर भी अगली सुनवाई पर योजना मांगी है। मामले पर अगली सुनवाई 11 मई को होगी।

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