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पैर छूने का मनोवैज्ञानिक महत्व - योशिता पांडेय

Sunday, May 9, 2021

/ by Dr Pradeep Dwivedi

योशिता  पांडेय, देहरादून

 

भारतीय संस्कृति में पैर छूना  यानि चरण स्पर्श करना  सदाचार का प्रतीक माना जाता है।बचपन से हम सभी अपने बड़े बुजुर्गों से सुना करते थे कि घर में जब भी भी कोई अतिथि,  कोई बुजुर्ग व्यक्ति, गुरुजन आए या कोई बड़ा व्यक्ति आए अर्थात जो हमसे उम्र में बड़ा हो तो उन्हें या तो पैर छू कर प्रणाम करो या  फिर हाथ जोड़कर  झुक कर प्रणाम करो। आज भी वही प्रथा कायम है और देखने को भी मिलती है।हमारे पूर्वजों और प्राचीन समय के विद्वानों की सबसे बड़ी खोज यह थी कि उन्होंने प्रकृति के कई रहस्यों को आज से हजारों साल पहले ही समझ लिया था। हालांकि उस दौर में ना तो विज्ञान इतना प्रचलित था, ना तो उनके पास मोबाइल था और ना ही इंटरनेट का माध्यम था । कुछ न होने के बावजूद, जो हमारे पूर्वज थे, ऋषि मुनि थे, वह अपने मानसिक प्रक्रिया के द्वारा भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं को देख लिया करते थे । साथ ही साथ किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व की पहचान भी देख कर कर लिया करते थे। हमारे ऋषि-मुनियों को समझा गया और उनके महत्व को पहचाना गया, फिर उनकी बातों को हमारी दिनचर्या में जोड़ा , जो  हमारे संस्कार बनते चले गए । 

अपने से बड़े बूढ़ों को चरण स्पर्श कर इज्जत देने का यह तरीका भी एक संस्कार बन गया। हालांकि आजकल के समय हमारे युवा वर्ग कुछ ज्यादा ही समझदार हो गए हैं और कुछ जगहों पर देखा जाता है कि समझदारी के साथ-साथ युवा अपने संस्कार को भी महत्व देते हैं । वहीं दूसरी ओर अगर हाई प्रोफाइल युवा वर्ग की बात करें तो उन्हें  इस संस्कार का महत्व समझ में ही नहीं आता ।  शायद कभी-कभी उन्हें अपने बड़े बुजुर्गों का चरण स्पर्श करने में शर्म की अनुभूति होती है। पाश्चात्य सभ्यता से ग्रस्त ये युवा कभी-कभी इतने आगे निकल जाते हैं कि अपने संस्कारों को भूल जाते हैं और कुछ भी समझने की स्थिति में नहीं रहते हैं ।

बड़े बुजुर्गों के आशीर्वाद के बिना उनके चरण स्पर्श किए बिना हमारा जीवन अधूरा है,और उन्हें लगता है कि पैर छूना यह एक व्यर्थ की प्रक्रिया है ।  वह इसे खानापूर्ति मान लेते हैं।अमूमन हम सभी देखते हैं कि अगर  कभी स्टेज परफारमेंस हो रही हो  या किसी भी सभागार में भीड़ की मौजूदगी में आज के युवा को  अगर उनके काम के लिए सम्मानित किया जाता है तो उन्हें अपने माता-पिता गुरुजनों या अपने बुजुर्गों का पांव छूने में  चरण स्पर्श करने में शर्म की अनुभूति होती है। उस खुशी के अवसर पर  भी आज के युवा यह भूल जाता है कि अगर उनको जन्म ही नहीं मिला होता, बड़े बुजुर्ग का साथ ही न मिला होता, तो क्या वह उस ट्रॉफी के या उस सम्मान के हकदार होते।आज के दौर कि अगर बात करें तो विज्ञान ने भी मान लिया है कि और यह सिद्ध भी हो चुका है कि पैर छूने से हमें एक सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

कहने का तात्पर्य है कि हमारे शरीर के चारों तरफ एक आभामंडल होता है। व्यक्ति के गुणों के अनुसार हर एक मनुष्य का आभामंडल का औरा अलग होता है , इसका रंग अलग अलग व्यक्ति में अलग अलग होता है।यह आभामंडल हमारे ऊर्जा, मानसिक शक्ति, इच्छाशक्ति और विचारों के प्रकार पर निर्भर करता है । हमारे विचारों और व्यवहार के बदलने से इनमें भी परिवर्तन होता है।जैसे मान लीजिए कि सकारात्मक आध्यात्मिक सोच वाले व्यक्ति का जो आभामंडल होगा वह प्रभावी होगा ,परन्तु किसी पापी या अहंकारी व्यक्ति का जो आभामंडल होगा वह बिल्कुल उसके विपरीत होगा। हालांकि जब हम किसी का पैर छूते हैं  ,

तो आदर और सम्मान की भावना के साथ झुककर चरण स्पर्श करते हैं और किसी के समक्ष झुकना,हमारे समर्पण और विनीत भाव को दर्शाता है।

जिसका हम चरण स्पर्श करते हैं उस पर तुरंत मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है । उसके हृदय से प्रेम, आशीर्वाद, संवेदना और सहानुभूति की भावना निकलती है , जो उसकी आभामंडल में परिवर्तित होकर परिवर्तन लाती हैं।इसीलिए कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति आपको पसंद नहीं करता है तो भी उससे दुश्मनी निकालने के बजाय आप उसके समक्ष झुक जाएं। लेकिन अगर कोई व्यक्ति, यदि किसी कारणवश आपको अपना दुश्मन मान बैठा है तो आप उससे बदला लेने के बजाय उसके सामने झुक जाए तो इससे आपकी दुश्मनी दोस्ती में तो परिवर्तित नहीं भी होगी ,तब भी वह व्यक्ति आपका बुरा करने की भी नहीं सोचेगा और ना तो आपको बददुआ देने की सोचेगा।

अब इस कथन में कितनी सत्यता है, कह पाना मुश्किल है । यह तो व्यक्ति अपने अनुभव के आधार पर ही बता सकता है। सही ढंग से ,अच्छी भावना के साथ चरण स्पर्श करना चाहिए , जिससे कि वह व्यक्ति आप के दिए गए सम्मान और आदर को अनुभव कर सके और उसके मन में आपके प्रति प्रेम और आशीर्वाद की भावना उत्पन्न हो, लेकिन एक बात का ध्यान रखिएगा कि जिसका आप चरण स्पर्श कर रहे हैं वह अच्छे आचरण वाले हैं या नहीं । यदि आपको लगता है कि वह व्यक्ति अच्छे आचरण का नहीं है, तो उनके पैर कदापि ना छुएं। उनके पैर छूने से आपको बिल्कुल भी लाभ नहीं होगा अपितु उस व्यक्ति की जो नकारात्मक उर्जा है , जो गंदी सोच है, वह मनोवैज्ञानिक दृष्टि से हो सकता है कि आपके अंदर परिवर्तित हो जाए,और यह भी कहा जाता है कि हमें उन्हीं के सामने झुकना चाहिए जो कि उसके काबिल हो। हालांकि काबिल का पैमाना तो तय कर पाना मुश्किल है।क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपने आप में परिपूर्ण नहीं होता है।

कुछ कमी प्रत्येक व्यक्ति में होती है। इसलिए हमें बहुत ही सद्बुद्धि के साथ बड़ों के पैर छूना चाहिए।उनके आशीर्वाद को ग्रहण करना चाहिए। हालांकि चरण छूने वाला जो व्यक्ति होता है वह दूसरों को भी अपने आचरण से प्रभावित करने में कामयाब होता है।जब हम किसी आदरणीय व्यक्ति के चरण छूते हैं तो आशीर्वाद के तौर पर उनका हाथ हमारे सिर के ऊपरी भाग को और हमारा हाथ उनके चरण को स्पर्श करता है । ऐसी मान्यता है कि इससे उस पूजनीय व्यक्ति की पॉजिटिव एनर्जी आशीर्वाद के रूप में हमारे शरीर में प्रवेश करती है।इससे हमारा आध्यात्मिक ,और मानसिक विकास होता है ।  शास्त्रों में भी कहा गया है कि हर रोज बड़ों के अभिवादन से आयु , विद्या, यश, बल में और बढ़ोतरी होती है।इसका वैज्ञानिक पक्ष भी है ।  न्यूटन के नियम के अनुसार दुनिया में सभी चीजें गुरुत्वाकर्षण के नियम से बनती हैं और अक्सर देखा गया है कि भारतीय आकर्षित करने वाले की तरफ ही जाता है । हमारे शरीर पर भी यही नियम लागू होता है सिर् को उत्तरी ध्रुव और पैरों को दक्षिणी ध्रुव माना गया है इसका तात्पर्य यह हुआ कि गुरुत्व और जाया चुंबकीय ऊर्जा हमेशा उत्तरी ध्रुव से प्रवेश कर दक्षिणी ध्रुव को प्रभावित करती है।यानी शरीर में उत्तरी ध्रुव से सकारात्मक उर्जा प्रवेश कर दक्षिणी ध्रुव पैरों की ओर प्रवाहित होती है ।दक्षिणी ध्रुव पर यह मात्रा में स्थिर हो जाती है । पैरों की ओर ऊर्जा का केंद्र बन जाता है । पैरों से हाथों द्वारा इस ऊर्जा के ग्रहण करने को हम चरण स्पर्श कहते हैं।सबसे खास बात यह भी है कि जब हम किसी के पैर छूते हैं तो हमें यह नहीं पता होता कि उनके पैर के अंगूठे से भी शक्ति का संचार होता है । लेकिन वास्तव में मनुष्य के पांव के अंगूठे में भी एक ऐसी ही शक्ति होती है।इसलिए ऐसी मान्यता है कि जब हम किसी व्यक्ति का पैर छुए तो सर्वप्रथम उनके पैर के अंगूठे को छुए और अगर व्यक्ति अपने लक्ष्यों को मन में रखकर अपने बड़ों को प्रणाम करता  है या उनका पैर छूता है,  तो ज्यादातर को उस लक्ष्य को पाने में बल मिलता है और सफलता भी मिलती है।साथ ही ,यह एक सूक्ष्म व्यायाम भी है।पैर छूने से शारीरिक कसरत होती है,साथ ही साथ झुकने से या साष्टांग दंडवत करने से शरीर लचीला होता है और आगे की ओर से झुकने से सिर में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद है ।

सबसे खास बात यह है कि प्रणाम करने का एक फायदा यह भी है कि इससे हमारा अहंकार कम होता है ।इन्हीं कारणों से बड़ों को प्रणाम करने की या पैर छूने की जो परंपरा है उसको भारतीय संस्कृति में, सनातन धर्म में, संस्कार का नाम दिया गया इसलिए जब भी पैर छुए तो झुक कर के छुए और  अगर आपको कोई व्यक्ति नहीं भी पसंद है तो भी अपने मन के विचारों को दरकिनार करके अपनी इच्छा जो आपके मन में है, जो चीज आप पाना चाहते हैं, उस को ध्यान में रखते हुए बड़ों के पैरों को स्पर्श करें और लाभ देखें ।

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