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जब एक साधु ने लिया पत्रकार का इंटरव्यू - निखिलेश मिश्रा

Tuesday, May 11, 2021

/ by Dr Pradeep Dwivedi

इंडेविन न्यूज नेटवर्क

निखिलेश मिश्रा, लखनऊ

 

पत्रकार- 

"सर, आपने अपने लास्ट लेक्चर में संपर्क (Contact) और जुड़ाव (Connection) पर स्पीच दिया लेकिन यह बहुत कन्फ्यूज करने वाला था। क्या आप इनका अंतर समझा सकते हैं ?"

साधु मुस्कराये और उन्होंने कुछ अलग...पत्रकारों से ही पूछना शुरू कर दियाः 

"आप न्यूयॉर्क से हैं?"

पत्रकार: "Yeah..."

संन्यासी: "आपके घर मे कौन-कौन हैं?"

पत्रकार को लगा कि.. साधु उनका सवाल टालने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि  उनका सवाल बहुत व्यक्तिगत और उसके सवाल के जवाब से अलग था।

फिर भी पत्रकार बोला : मेरी "माँ अब नही हैं, पिता हैं तथा 3 भाई और एक बहन हैं ! सब शादीशुदा हैं। "

साधू ने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए पूछा:

 "आप अपने पिता से बात करते हैं?"

पत्रकार चेहरे से गुस्सा झलकने लगा...

साधू ने पूछा, 

"आपने अपने फादर से last कब बात की थीं ?"

पत्रकार ने अपना गुस्सा दबाते हुए जवाब दिया : 

"शायद एक महीने पहले।"

साधू ने पूछा: 

"क्या आप भाई-बहन अक़्सर मिलते हैं? आप सब आखिर में कब मिले एक परिवार की तरह ?"

इस सवाल पर पत्रकार के माथे पर पसीना आ गया कि इंटरव्यू मैं ले रहा हूँ या ये साधु ? ऐसा लगा साधु, पत्रकार का इंटरव्यू ले रहा है?


एक आह के साथ पत्रकार बोला : 

"क्रिसमस पर 2 साल पहले"

साधू ने पूछा: 

"कितने दिन आप सब साथ में रहे ?"


पत्रकार अपनी आँखों से निकले आँसुओं को पोंछते हुये बोला :  

"3 दिन...!"

साधु: "कितना वक्त आप भाई-बहनों ने अपने पिता के बिल्कुल करीब बैठ कर गुजारा ?

पत्रकार हैरान और शर्मिंदा दिखा और एक कागज़ पर कुछ लिखने लगा...।


साधु ने पूछा: 

"क्या आपने पिता के साथ नाश्ता , लंच या डिनर लिया ? क्या आपने अपने पिता से पूछा के वो कैसे हैं ? माता की मृत्यु के बाद उनका वक्त कैसे गुज़र रहा है...!

साधु ने पत्रकार का हाथ पकड़ा और कहा: 

"शर्मिंदा, या दुःखी मत होना। मुझे खेद है अगर मैंने आपको अनजाने में चोट पहुँचाई हो, लेकिन ये ही आपके सवाल का जवाब है। "संपर्क और जुड़ाव" (Contact and Connection)

आप अपने पिता के सिर्फ संपर्क (Contact) में हैं, पर आपका उनसे कोई 'Connection'  (जुड़ाव ) नही हैं। You are not connected to him. आप अपने father से संपर्क में हैं, जुड़े नही हैं।

Connection हमेशा आत्मा से आत्मा का होता है। heart से heart होता है। एक साथ बैठना, भोजन साझा करना और एक दूसरे की देखभाल करना, स्पर्श करना, हाथ मिलाना, आँखों का संपर्क होना, कुछ समय एक साथ बिताना


आप अपने  पिता, भाई और बहनों  के 

संपर्क ('Contact') में हैं लेकिन आपका आपस में कोई' जुड़ाव '(Connection) नहीं हैं"

पत्रकार ने आँखें पोंछी और बोला: 

"मुझे एक अच्छा और अविस्मरणीय सबक सिखाने के लिए धन्यवाद"

आज यह भारत की भी सच्चाई हो चली है। सबके हज़ारों संपर्क (contacts) हैं, पर  कोई  जुड़ाव connection नहीं हैं। कोई विचार-विमर्श  नहीं है। हर आदमी अपनी-अपनी नकली दुनियाँ में खोया हुआ है। 

आइए हम सब भी अपने connection खोजें, बढ़ाएं और उन्हें पुष्ट करें।

वो साधु और कोई नहीं "स्वामी विवेकानंद" थे।”

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