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मेरे हक़ में दुआ करता है कोई (ग़ज़ल) - जमुना प्रसाद बेताब

Wednesday, June 30, 2021

/ by Dr Pradeep Dwivedi

रचनाकार - जमुना प्रसाद बेताब
मुंगावली, मध्यप्रदेश

बलाओं से बहुत लड़ता है कोई

ज़रा से खौंफ़ से डरता है कोई


उछलता हूं नदी में डूबकर मैं

मेरे हक़ में दुआ करता है कोई


किसी के पास में खु़शियां बहुत हैं

ग़मों की आग में जलता है कोई


जहां में झूठ का है बोलबाला

मगर सच बात भी करता है कोई


बहुत ऊंचाईयों पे जाके सोचा

बुलन्दी पर कहां रुकता है कोई


संभल पाना बहुत मुश्किल है उसका

नज़र से जो बशर गिरता है कोई


बड़ी राहें कठिन हैं ज़िन्दगी कीं

यहां गिरता है और उठता है कोई


बुरा "बेताब" आया है ज़माना

यहां करता है और भरता है कोई

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