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हम दोनों ही एक लंबे सफर के मुसाफिर - पूजा खत्री

Tuesday, June 8, 2021

/ by Dr Pradeep Dwivedi

 

रचनाकार - पूजा खत्री
लखनऊ

मैं बह रही थी 

नदी सी शांत चित्त 

और वो वेग उठाए 

समुन्दर का किसी और ही

ख्यालों में.....

हम दोनों ही एक लंबे सफर के मुसाफिर 

साथ बह रहे थे 

अपने-अपने गंतव्य की ओर ........

बिना छुए महसूस करते हुए

हम साथी 

हर सफर के 

हर कदम साथ चलते-चलते

बस यूं ही मैं और तन्हाईयां .....

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