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योगी सरकार का का बड़ा कदम, 25 करोड़ वाले UP में आबादी घटाने की नीति लाएगी सरकार

Friday, July 9, 2021

/ by Editor

लखनऊ

करीब 25 करोड़ की आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में योगी सरकार नई जनसंख्या नीति पर काम कर रही है। सरकार ने दूसरे राज्यों की जनसंख्या नीति का अध्ययन करने के बाद अब 11 जुलाई को नई जनसंख्या नीति घोषित करने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि साल 2021-30 की अवधि के लिए प्रस्तावित नीति के माध्यम से परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत जारी गर्भ निरोधक उपायों की सुलभता को बढ़ाया जाना और सुरक्षित गर्भपात की समुचित व्यवस्था देने की कोशिश होगी।

यह नीति अमल में आने के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से नवजात मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर को कम करने का प्रयास होगा। साथ ही नपुंसकता-बांझपन की समस्या के समाधान उपलब्ध कराते हुए जनसंख्या रोकने के प्रयास भी किए जाएंगे।

नई नीति में 11 से 19 साल के किशोरों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य के बेहतर प्रबंधन करने पर जोर होगा। बुजुर्गों की देखभाल के लिए व्यापक व्यवस्था करना भी अहम मुद्दा है। 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नवीन जनसंख्या नीति 2021-30 जारी करेंगे।

आबादी के लिए गरीबी और अशिक्षा बड़ा कारण
मुख्यमंत्री ने बुधवार को लोकभवन में नई जनसंख्या नीति 2021-30 का मसौदा पेश किया है। उन्होंने कहा, आबादी विस्तार के लिए गरीबी और अशिक्षा बड़ा कारण है। समुदायों में भी जनसंख्या को लेकर जागरूकता का अभाव है। ऐसे में समुदाय केंद्रित जागरूकता प्रयास की जरूरत है। प्रदेश की मौजूदा जनसंख्या नीति 2000-16 की अवधि समाप्त हो चुकी है। अब नई नीति समय की मांग है।

जन्म दर 2% से नीचे लाने का लक्ष्य
प्रस्तावित जन्म दर को प्रदेश में 2026 तक 2.1% तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 के अनुसार यूपी की जन्म दर अभी 2.7% है, जो राष्ट्रीय औसत से 2.2% से अधिक है। इसे 2030 तक 1.9% तक लाने का लक्ष्य है। इसके लिए परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत गर्भ निरोधक उपायों की पहुंच बढ़ाने और स्वास्थ्य सुविधा बेहतर करने पर जोर रहेगा। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से बाल मृत्यु दर व और मातृ मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलेगी। इससे नियोजन को बढ़ावा मिल सकेगा। खास बात यह है कि नई नीति में किशोरों के स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। अभी तक एनीमिया और कुपोषण अभियानों में किशोरी स्वास्थ्य पर ही अधिक ध्यान रहता है। इसके अलावा बुजुर्गों के देखभाल व बेहतर सुविधाओं पर भी जोर रहेगा।

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