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भारत में उच्च शिक्षा की स्थिति जमीनी हकीकत

Thursday, September 2, 2021

/ by Dr Pradeep Dwivedi

लेखिका - क्षमा द्विवेदी
तीर्थराज प्रयाग

वर्तमान शिक्षा प्रणाली मैकाले द्वारा निर्धारित नीति  पर आधारित है , वर्तमान शिक्षा नीति काफी दोषपूर्ण है , इसलिए वर्तमान में शिक्षा उच्च शिक्षा हो या बेसिक शिक्षा हो समाज और संस्कृति के अनुरूप बेहतर नही है , सबसे ज्यादा खामियाजा यांत्रिकी वर्ग को है , जिसकी वजह से बेरोजगारी बेकारी की भरमार है , वर्तमान समय की शिक्षा धर्म और संस्कृति से दूर कर रही है , वर्तमान शिक्षा में शिक्षा का केवल व्यवसाई करण हो रहा , वर्तमान शिक्षा में धर्म और जाति से परे होकर भारतीय संस्कृति की छाप होनी चाहिए , उच्च शिक्षा में शिक्षित होने वाले शोधार्थी को भारत में अपनी शिक्षा का विचार व्यक्त करने का पूर्ण अधिकार होना चाहिए , और उसको जमीनी धरातल पर विस्तार करने में सरकार का पूरा सहयोग होना चाहिए , शिक्षा में मातृभूमि के प्रति पूरा समर्पण होना चाहिए , वर्तमान शिक्षा प्रणाली में राजनीतिक दखल अंदाजी बिल्कुल भी नही होनी चाहिए , शिक्षा को सुचारू रूप से उत्कृष्ट बनाने के लिए प्रवेश के समय ही विद्यार्थियों की मानसिक स्तर की जांच होनी चाहिए , बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने के लिए प्राइमरी स्तर से ही सुधार होना चाहिए , शिक्षा प्रणाली में आमूल भूत सुधार करने के लिए सामाजिक स्तर पर चर्चाएं होनी चाहिए , परिवर्तन प्रकृति का नियम है , अब शिक्षा में बदलाव लाना चाहिए , अंग्रेजियत के चक्कर में देश पतन की ओर अग्रसर हो रहा समय रहते सुधार की आवयश्कता है , शिक्षा प्रणाली में अनेकानेक दोष है , शिक्षा मानव को अधिकार सिखाती हैं , लेकिन कर्तव्य नही सिखाती हैं , शिक्षा से मानव आर्थिक मानव तो बन जाता है पर वह सामाजिकता को भूल जाता है , और समाज से दूर होता जाता है , उच्च शिक्षा में नैतिक मूल्यों को शामिल न करना भी दोष पूर्ण है , इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि शिक्षा बालक को एकांकी जीवन जीना सिखाती है , परिवार से अलगाव इस शिक्षा की ही देन है , और व्यक्ति आशावादी दृष्टिकोण से दूर होता जा रहा , परिणाम स्वरूप निराशा अपना वर्चस्व स्थापित कर रहा , सभ्यता संस्कृति संस्कार विलुप्त होता जा रहा है , वर्तमान समय में प्राचीन शिक्षा प्रणाली का स्तर निम्न होता जा रहा है , इसका परिणाम यह हुआ कि शिक्षा से साहित्य कला पतन की ओर अग्रसर हो रही है , उच्च शिक्षा प्राप्त कर मानव मशीन होता जा रहा है , नौकरी की ओर ज्यादा ध्यान दे रहा , मानवीय मूल्यों की अनदेखी कर रहा है , आधुनिकीकरण के वशीभूत होकर परिवार समाज से अलग थलग होता जा रहा !

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