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प्रधानमंत्री मोदी ने किया रक्षा मंत्रालय के नए दफ्तरों का उद्घाटन

Thursday, September 16, 2021

/ by Editor

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सेन्ट्रल विस्टा परियोजना की आलोचना करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए आज कहा कि इन लोगों ने केवल भ्रम फैलाने की कोशिश की और सैकड़ों वर्ष पुराने तथा जर्जर हटमेंट्स एवं बैरकों में काम करने वाले सैन्य अधिकारियों की परेशानियों पर चुप्पी साधे रखी।  मोदी ने गुरूवार को यहां रक्षा मंत्रालय के कस्तूरबा गांधी मार्ग और अफ्रीका एवेन्यू स्थित दो नवनिर्मित कार्यालय परिसरों का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में कहा कि कुछ लोगों ने केवल भ्रम फैलाने के लिए इस परियोजना का विरोध किया और वास्तविकता तथा जरूरतों को नजरंदाज किया। उन्होंने कहा , ‘‘ जो लोग सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के पीछे डंडा लेकर पड़े थे वे हटमेंट्स पर चुप्पी साधे रहे। वे केवल भ्रम फैला रहे थे।

'' प्रधानमंत्री ने कहा कि सेन्ट्रल विस्टा परियोजना के तहत बनाये गये इन दोनों भवनों को देखकर देश को समझ आ जायेगा कि सरकार किस उद्देश्य को लेकर कार्य कर रही है।  पूर्ववर्ती सरकारों को कठघरे में खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि इन खस्ताहाल हटमेंट्स की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया और हर कोई इनमें मरम्मत और पेंटिंग आदि कराकर काम चलाता रहा। मीडिया पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया ने भी कभी इस बारे में नहीं लिखा कि हमारे सैन्य अधिकारी किन परेशानियों और हालातों में जर्जर भवन में काम कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि विपक्षी दलों तथा कुछ संगठनों ने सरकार की महत्वाकांक्षी सेन्ट्रल विस्टा परियोजना का विरोध करते हुए इसे फिजूलखर्ची करार दिया था और इसके खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

मोदी ने कहा कि इन भवनों को बनाते समय राजधानी की पहचान, जीवंतता , संस्कृति और पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा गया है। यह आजादी के 75 वें वर्ष में राजधानी की आधुनिक जरूरतों तथा आकांक्षाओं को विकसित करने की दिशा में एक कदम है। उन्होंने कहा , ‘‘ राजधानी केवल शहर नहीं होती। यह देश की सोच, संकल्प, सामर्थ्य और संस्कृति का प्रतीक होती है जिसके केन्द्र में लोक तथा जनतंत्र होता है। सेन्ट्रल विस्टा परियोजना के मूल में यहीं भावना है। ''  पीएम मोदी ने कहा, 'हमने कामकाज की नई शैली अपनाई है। मुझे 2014 में आपने सेवा का मौका दिया था। मैं सरकार में आते ही संसद भवन को बनाने का काम शुरू कर सकता था। लेकिन हमने यह रास्ता नहीं चुना। सबसे पहले हमने देश के लिए जान देने वालों के लिए स्मारक बनाना तय किया। आजादी के तुरंत बाद जो काम होना चाहिए था, उसे हम आज कर रहे हैं।

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