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किसान, मजदूर और नौजवान हैं बहुत परेशान: वरुण गांधी

Monday, December 20, 2021

/ by इंडेविन टाइम्स

पीलीभीत। 

उत्तर प्रदेश में पीलीभीत से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद वरुण गांधी ने किसान, मजदूर और नौवजानों की परेशानियों का जिक्र करते हुये कहा है कि इनकी तर्ज पर निजीकरण से बैंककर्मी और संविदाकर्मी भी बहुत कष्ट में हैं। गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र पीलीभीत के दो दिवसीय दौरे पर रविवार को यहां यशवंतरी देवी मंदिर प्रांगण में विभिन्न विभागों के संविदा कर्मचारियों के एक कार्यक्रम में कहा कि वह जान चुके हैं कि देश के किसान, मज़दूर और नौजवानों तथा निजीकरण से परेशान बैंककर्मियों की तरह संविदाकर्मी भी बहुत कष्ट में हैं। इस दौरान उन्होंने केन्द्र और प्रदेश में अपनी ही पार्टी की सरकार को निशाने पर रखा।

इससे पहले संविदाकर्मियों के साथ ज़मीन पर बैठकर उन्होंने उनकी समस्याओं को सुना। संविदाकर्मियों को संबोधित करते हुये उन्होंने कहा, ‘‘भीख मांगने से कभी सम्मान और अधिकार नहीं मिलता, अपनी ताकत को पहिचानिए। खुद को संगठित करके इस क़दर अपनी शक्ति दिखाइए कि उसके बाद अधिकारों के लिए किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े।'' वह आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, शिक्षा मित्रों, आशा बहुओं, रोज़गार सेवकों, अनुदेशक कर्मचारियों सहित जि़ले के विभिन्न विभागों में तैनात संविदा कर्मचारियों की समस्याओं को उजागर करने के लिये यहां आयोजित संयुक्त सम्मेलन को सोधित कर रहे थे।

उन्होंने किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुये कहा कि पिछले सवा साल से बड़ी बहादुरी के साथ अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहे देश के किसानों का जब उन्होंने साथ दिया तो कुछ लोग मुझसे कहने लगे कि उनकी अपनी पार्टी क्या सोचेगी। गांधी ने कहा, ‘‘ऐसे लोगों को मैंने जवाब में यही कहा कि पाटर्ी को तो हम समझा लेंगे इससे पहले हमको सोचना है कि देश क्या सोचेगा। अगर हम इसी तरह धोखा देते रहे तो हम हिंदुस्तान को कमज़ोर कर रहे हैं जिसे बर्दाश्त नही किया जा सकता।'' उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को संसद में भी उठायेंगे और जरूरत पड़ी तो संविदाकर्मियों की ताक़त और आवाज़ बनकर लखनऊ में भी साथ बैठेंगे। भाजपा सांसद ने खुद को ईमानदारी से काम करने वाला बताते हुए कहा कि वह उन लोगों की तरह नहीं हैं जो ज़ुल्म और भ्रष्टाचार के बलबूते अपनी बड़ी बड़ी कोठियां बनवाते हैं। गांधी ने कहा कि उन्होंने 13 साल से कोई वेतन नहीं लिया, न सरकारी गाड़ी से चलते हैं न सरकारी मकान में रहते हैं। 

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