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आजादी की लड़ाई में संत भी जुटे, आध्यात्मिक धारा इतिहास में वैसे दर्ज नहीं हुई, जैसे होना चाहिए- पीएम मोदी

Tuesday, December 14, 2021

/ by इंडेविन टाइम्स
वाराणसी  

अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के सबसे बड़े मेडिटेशन सेंटर स्वर्वेद महामंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने सदगुरु सदाफल महाराज को नमन किया और आजादी में उनकी भूमिका का वर्णन करते हुए कहा कि कई संत भी आध्यात्मिक तप छोड़कर आजादी के लिए जुटे थे। हमारे स्वाधीनता संग्राम की ये आध्यात्मिक धारा ​इतिहास में वैसे दर्ज नहीं की गई जैसे की जानी चाहिए थी।

वाराणसी में अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के सबसे बड़े मेडिटेशन सेंटर स्वर्वेद महामंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने सदगुरु सदाफल महाराज को नमन किया और आजादी में उनकी भूमिका का वर्णन करते हुए कहा कि कई संत भी आध्यात्मिक तप छोड़कर आजादी के लिए जुटे थे। हमारे स्वाधीनता संग्राम की ये आध्यात्मिक धारा ​इतिहास में वैसे दर्ज नहीं की गई जैसे की जानी चाहिए थी।

पीएम मोदी ने कहा कि बनारस जैसे शहरों ने मुश्किल से मुश्किल समय में भी भारत की पहचान, कला , उद्यमिता के बीजों को सहेजकर रखा है। जहां बीज होता है, वृक्ष वहीं से विस्तार लेना शुरू करता है और इसीलिए आज जब हम बनारस के विकास की बात करते हैं तो इससे पूरे भारत के विकास का रोडमैप भी बनता है। कल काशी ने भव्य विश्वनाथ धाम महादेव के चरणों में अर्पित किया। आज विहंगम योग का समागम हो रहा है। आज जब संतों की साधन पुण्य फल को प्राप्त करती है तो सुखद सहयोग बनते ही चले जाते हैं। संतो ने देश को एकता के सूत्र में पिरोए रखा। ऐसे कितने ही संत थे जो आध्यात्मिक तप छोड़कर आज़ादी के लिए जुटे, हमारे स्वाधीनता संग्राम की ये आध्यात्मिक धारा ​इतिहास में वैसे दर्ज़ नहीं की गई जैसे की जानी चाहिए थी।

पीएम मोदी ने कहा कि आज काशी के कौशल को नई ताकत मिल रही है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुविधाओं से बनारस बड़े मेडिकल हब के रूप में उभर रहा है। दिल्ली में रहता हूं तब भी काशी के विकास को गति देने के बारे में सोचता रहता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि कल रात भी मैंने बनारस के विकास को देखा। गोदौलिया अद्भुत हो गया है। बनारस स्टेशन का विकास  अध्यात्मिता के साथ हुआ है। बनारस देश को नई दिशा दे रहा है।  इच्छा शक्ति हो तो परिवर्तन आ सकता है। यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या दोगुनी हो गई है। कोरोना के काल खंड में भी 30 लाख लोग बनारस के एयरपोर्ट से आए और गए हैं।  काशी की ऊर्जा अक्षुण्ण तो है ही, ये नित नया विस्तार भी लेती रहती है। कल काशी ने भव्य विश्वनाथ धाम को महादेव के चरणों में अर्पित किया और आज विहंगम योग संस्थान का ये अद्भुत आयोजन हो रहा है।

योग संस्थान का 98वां वार्षिकोत्सव सदगुर सदाफल गुरु के कारागार यात्रा और आजादी के अमृत उत्सव का साक्षी बन रहे हैं। आज गीता जयंती का पुण्य अवसर भी है। आज के ही दिन कुरुक्षेत्र की भूमि में जब सेनाएं आमने-सामने थी, योग, परमात्मा का परम ज्ञान मिला था। 

सदगुरु सदाफल देव ने समाज के जागरण के लिए विहंगम योग को जन-जन तक पहुंचाने केलिए यज्ञ किया। आज वह संकल्प भी हमारे सामने इतने विशाल वटवृक्ष के रूप में खड़ा है। आज 5101 यज्ञ और सेवा प्रकल्पों के रूप में हम उस संत संकल्प की सिद्धि को अनुभव कर रहे हैं। उनकी आध्यात्मिक उपस्थिति को नमन कर रहा हूं।  यह महामंदिर जब पूर्ण हो जाएगा तो न सिर्फ काशी नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए नजराना बन जाएगा। यह भारत ही है जिसके आजादी के नायक को दुनिया महात्मा बुलाती है। यहीं पर आध्यात्मिक चेतना निरंतर प्रवाहित होती रहती है।
आज से दो दिन बाद 16 तारीख को जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग पर बड़ा आयोजन होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि आप सभी भी प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी प्राप्त करें और किसानों को घर-घर जाकर बताएं। इस ऐसा आंदोलन है जिसे घर-घर पहुंचना चाहिए।

आज देश अनेक संकल्पों पर काम कर रहा है। सद्गुरु सदाफल जी के आदर्शों पर काम करते हुए देश कितने ही अभियान चला रहा है। दो साल बाद 100वां वार्षिकोत्सव मनाएगा। दो साल का समय है। उसके लिए कुछ संकल्प लेना चाहता हूं। एक संकल्प हो बेटी को पढ़ाना है। हमारे बेटियों को कौशल विकास के लिए तैयार करना है। जो लोग जिम्मेदारी संभाल सकते हैं, एक दो बेटियों के लिए जिम्मेदारी उठाएं। एक संकल्प हमारे जल संसाधनों को स्वच्छ रखना है। प्राकृतिक खेती को बढ़ाने और स्वच्छा को आगे बढ़ाना है।

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