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डिजिटल मीडिया को भी मीडिया नियामक नियमों में लाने की तैयारी, सरकार संसद में पेश करेगी विधेयक

नई दिल्ली। 

देश में डिजिटल मीडिया को विनियमित करने और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का सामना करना से संबंधित एक विधेयक लाने की तैयारी में है। ये विधेयक अगर दोनों सदनों से पास हो जाता है तो भारत में समाचार पत्रों और प्रिंटिंग प्रेस को नियंत्रित करने वाली प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम, 1867 की जगह लेगा।

केंद्र सरकार समचार पत्रों के लिए नई पंजीकरण व्यवस्था के लिए बिल तैयार कर रही है जिसमें डिजिटल मीडिया उद्योग भी शामिल होगा। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार देश में डिजिटल मीडिया को विनियमित करने और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का सामना करना से संबंधित एक विधेयक लाने की तैयारी में है। ये विधेयक अगर दोनों सदनों से पास हो जाता है तो भारत में समाचार पत्रों और प्रिंटिंग प्रेस को नियंत्रित करने वाली प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम, 1867 की जगह लेगा। ऐसा हुआ तो डिजीटल मीडिया उद्योग को भी प्रेस रजिस्ट्रार जनरल के साथ रजिस्ट्रेशन  करना जरूरी होगा।

कैबिनेट द्वारा लाए जाने वाले विधेयक "किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के माध्यम से डिजिटल मीडिया पर समाचार" को शामिल करने का प्रस्ताव है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकार जल्द ही कैबिनेट के समक्ष बदलाव के साथ प्रेस और पत्रिका पंजीकरण विधेयक, 2019 का प्रस्ताव रखेगी। नया विधेयक औपनिवेशिक युग के प्रेस और पुस्तकों के पंजीकरण अधिनियम, 1867 की जगह लेगा, जो वर्तमान में भारत में समाचार पत्र और प्रिंटिंग प्रेस उद्योग को नियंत्रित करता है।  

2019 में केंद्र ने प्रेस और आवधिक विधेयक के पंजीकरण का मसौदा तैयार किया था, जिसमें डिजिटल मीडिया पर समाचार को "डिजिटल प्रारूप में समाचार" के रूप में परिभाषित किया गया था। जिसे इंटरनेट, कंप्यूटर या मोबाइल नेटवर्क पर प्रसारित किया जा सकता है और इसमें टेक्स्ट, ऑडियो, वीडियो और ग्राफिक्स शामिल हैं। इसे लेकर तब बहस छिड़ गई थी, कई लोगों ने आरोप लगाया था कि यह डिजिटल समाचार मीडिया को 'नियंत्रित' करने का प्रयास है। 

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